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 माँ, हर एक के जीवन में महत्वपूर्ण व सर्वश्रेष्ठ होता है क्योंकि इस दुनिया में किसी भी चीज को माँ की ममता से नहीं तोला जा सकता। जब हम इस दुनिया में आते हैं तो हमारा पहला शब्द ही माँ होता है। वो ही हमारा पहला प्यार, वो ही हमारा पहला शिक्षक और वो ही हमारा पहला दोस्त होती है। और ये माँ ही होती है जो हमें अपनी पलकों की छाया में पालती पौसती है और इस काबिल बनाती है, कि हम इस दुनिया को जान सके और कुछ कर सके... माँ पर कविता लिखना आसान तो नहीं है पर मैने कुछ कोशिस की है तो उम्मीद करता हु आप सभी को पसंद आएगी....


माँ पर कविता :- मेरी प्यारी मां
माँ पर कविता :- मेरी प्यारी मां



नहीं समझ आता मां
की शुरुआत कहां से करूं,
तुम्हारा थोड़ा सा कर्ज चुका पाऊं में
आज ऐसा क्या लिखूं।





हर दिन मेरा ध्यान रखा है तुमने,
दर्द रहता है तुम्हारे हाथ में
पर कभी कहां कुछ कहा है तुमने।


आज क्या बनाऊं तेरे लिए
हर रोज कितने प्यार से पूछती हो,
मेरी हर चीज का ध्यान रहता है तुम्हें
फिर क्यों अपनी दवा लेना भूलती हो।


मां एक बात बताओ
आखिर इतना बड़ा दिल
कहां से पाया है तुमने,
जो हर बार अपने हिस्से का खाना
अपने हाथों से खिलाया है तुमने।

हमारे बारे मैं सोचते-सोचते
अपने बारे में सोचना भूल गई ना,
इतना कुछ दिया मुझे हमेशा
और आज फिर अपने लिए कुछ लेना भूल गई ना।
मां मुझे तो याद भी नहीं है,
की आखरी बार तू कब
शॉपिंग पर गई है?


कोई बात हो या ना हो
पर घर आते जिसका चेहरा देखना चाहता हूं,
वो तुम हो मां..
हार जाऊं भी अगर कभी
जिसको देखकर फिर जीत जाता हूं। वो तुम हो मां..


मां चलो ना आज साथ बैठकर
थोड़ा बात करते हैं,
मेरी नहीं बल्कि आज
तुम्हारे बचपन को याद करते हैं।
मां मुझे पता है मैं बहुत बुरा हूं
तुम इतना कुछ करती हो मेरे लिए,
और मैं कहां कुछ करता हूं।
तुमने हर गलतियां मेरी हंसते-हंसते माफ किया हैं,
और मैं फिर भी तुमसे लड़ता हूं।


खुद को देखता हूं ना जब,
तो मैं दिन-रात सपनों के पीछे भागा रहता हूं।
पर जब तुम्हें देखता हूं,
तो तुम में भी सिर्फ खुद को ही देखता हूं।


मां कैसे.. कैसे तुमने मेरे लिए अपने सारे ख्वाब तोड़ दिए,
सपना तो रहे होंगे ना तुम्हारे भी कभी
तो वो फिर कैसे इतनी आसानी से छोड़ दिए।


मेरा ना एक दोस्त है मां
जिसका कोई मां नहीं है,
खाना खाया क्या बेटा तुमने
ऐसा कोई पूछने वाला नहीं है।

एहसास तब होता है मां
कि मैं सच में बहुत खुश किस्मत हूं,
जो अपनी इन उंगलियों में
में आज भी तुम्हारा हाथ देख पाता हूं।


मां बस इतनी दुआ है उस रब से
कि वो सपने दूर रहे मुझसे
जिसमें मां तुम साथ ना हो,
जिस बात से तुम्हारे दिल को ठेस पहुंचे
मां मेरी जुबां पर कभी वो बात ना हो।


हर चीज मुझे सिखाई है
हर चीज़ मुझे बताई है,
मैं लापरवाह सा हूं
पर तुमने वो कमी भी मेरी सराही है।


कभी-कभी सोचता हूं 
कि ये जिंदगी कैसे होती,
बिन तुम्हारे आखिर मेरी ये
रातें कैसी होती।


बचपन में बहुत रोता था मां
दो पल के लिए भी अगर तुम्हारा चेहरा 
ओझर हो जाए....
सोचने से भी रुह काप उठती है अब तो
बस दुआ है कि कभी वो रात ना आए।

कोई सपने भी पूरे ना हुए ना अब
मां मुझे कोई गम नहीं होगा,
मेरी मां मेरे साथ हर वक्त है
इससे ज्यादा सुकून और कहां होगा।


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पढ़िए दिल की बातें कि ये कविताएं
धन्यवाद ।

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